Deled course closed till 2030: deled क्या होता है?
Deled course closed till 2030: डी.एल.एड स्नातक के बाद 2 साल (4 सेमेस्टर) का कोर्स है। डी.एल.एड स्कूलों मेंप्राथमिक शिक्षण भूमिकाओं के लिए तैयार करता है जो छात्रों के लिए सीखने को मज़ेदार बनाता है। डी.एल.एड को शुरू में(बीटीसी) कहा जाता था लेकिन अब इसे डी.एल.एड कहा जाता है। डी.एल.एड प्राथमिक कक्षाओं को पढ़ाने के लिए बुनियादीपाठ्यक्रम है क्योंकि प्राथमिक शिक्षक छात्रों के लिए सीखने को मज़ेदार बनाते हैं। डी.एल.एड कोर्स ने देश में प्राथमिक शिक्षा कोबदल दिया है, जिसके परिणामस्वरूप प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की संख्या में तेज़ी से वृद्धि हुई है। माता–पिता अपनेबच्चों को स्कूलों में दाखिला दिलाते हैं ताकि प्रिंसिपल बच्चों को स्कूल में आने से पहले स्कूल के माहौल के लिए तैयार कर सकें।
Deled course closed till 2030: deled के लिए शैक्षिक योग्यता
Deled course closed till 2030: डी.एल.एड. के लिए किसी भी स्ट्रीम में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ ग्रेजुएट होनाजरूरी है। हालांकि, अगर पोस्ट ग्रेजुएट भी प्राइमरी टीचर बनना चाहते हैं तो वे यह कोर्स कर सकते हैं। इसके लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष होनी चाहिए।
Deled course closed till 2030: डीएलएड 2030 तक ख़त्म
Deled course closed till 2030: छह साल बाद 2030 से शिक्षक बहाली के लिए न्यूनतम योग्यता बदल जाएगी। सभी तरहके शिक्षकों की बहाली 4 वर्षीय इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (आईटीईपी– 12वीं के बाद चार वर्षीय बीएड) के आधार परहोगी। इतना ही नहीं वित्तीय वर्ष 2027-28 तक शिक्षक प्रशिक्षण के लिए अभ्यर्थियों के सभी डीएलएड कार्यक्रम एक–एक कर बंदकर दिए जाएंगे। फिलहाल 2024-25 सत्र शिक्षक शिक्षण प्रशिक्षण के लिए अंतिम सत्र होगा। दरअसल अब देशभर में शिक्षकोंकी बहाली के लिए न्यूनतम योग्यता में बदलाव होना है। फिलहाल अलग–अलग राज्यों में यह अलग–अलग है। हालांकि झारखंडसमेत कई राज्यों में डीएलएड जैसे शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम बंद कर दिए गए हैं। जल्द ही इसे बिहार समेत अन्य राज्यों में भी लागूकिया जाएगा।

Deled course closed till 2030: अब भागलपुर समेत पूरे बिहार और पूरे देश में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए न्यूनतमयोग्यता में बदलाव की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसमें बिहार समेत पूरे देश में डायट की संख्या बढ़ाने की योजना है। इसकेबाद शिक्षकों के लिए विभिन्न प्रकार के सेवाकालीन शिक्षण प्रशिक्षण की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है। शिक्षा मंत्रालयकी अंतिम अवधारणा के अनुसार आने वाले 6 वर्षों में यानी वर्ष 2030 तक बिहार समेत सभी राज्यों को विश्वविद्यालय अनुदानआयोग द्वारा तय मानकों के आधार पर बहुविषयक संस्थानों को विकसित करने की तैयारी करनी होगी। शिक्षक अभ्यर्थियों के लिएजहां स्नातक के बाद किसी विशेष विषय में दो वर्षीय बीएड डिग्री की मान्यता भी बनी रहेगी। वहीं, जिन लोगों के पास चार वर्षीयस्नातक डिग्री है, या जिन्होंने किसी विशेष विषय में एमए किया है, उनके लिए एक वर्षीय बीएड डिग्री पर भी काम चल रहा है।
शिक्षण प्रशिक्षण के लिए डीएलएड समेत अन्य कार्यक्रम समाप्त करने की योजना है। सत्र 2024-25 डीएलएड प्रशिक्षण काअंतिम सत्र हो सकता है। तब शिक्षक भर्ती के लिए न्यूनतम योग्यता 4 वर्षीय एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम होगी। देश में डायटकी संख्या बढ़ाने पर काम चल रहा है। यह 2030 तक हो जाएगा। – श्रुति, प्राचार्य, डायट, भागलपुर